हम क्यों देते हैं हिंदू धर्म में पुनर्प्रवेश?
2.1.10
संपूर्ण विश्व में सनातन वैदिक संस्कृति अत्यंत प्राचीन है. विश्व में इस संस्कृति के हिंदू लोग अनेक देशों में वास्तव्य करते थे. इस बात के असंख्य प्रमाण हमें प्राचीन ग्रंथों में देखने को मिलते हैं. विश्वव्यापक यह हिंदू संस्कृति धीरे-धीरे विलुप्त होते-होते अब केवल नाममात्र भारत देश में औषधि की तरह शेष बची है, यदि ऐसा कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. इस हिंदू संस्कृति के पश्चात अनेक वर्षों में उदित हुई अनेक संस्कृतियां (धर्म) आज विश्वव्यापी होती जा रही हैं. विश्व में मुस्लिम, ईसाई जैसे धर्म विश्व के प्रत्येक देश में अपना स्वयं का अस्तित्व निर्माण करने लगे हैं... नहीं अपितु संपूर्ण देश ही उनकी मालकियत का होने जैसा चित्र आज अनेक देशों में दिखाई दे रहा है. दोनों ही संस्कृतियों को बड़ी प्यास लगी है... अन्य संस्कृतियों को पीकर विश्व में केवल एकमेव स्वधर्मीयों का ही वर्चस्व हो... इस स्पर्धा से कहीं हिंदू धर्म गिलंकृत न हो जाए? ऐसी परिस्थिति आज निर्माण हो गई है? ऐसा एक भी देश इस पृथ्वी पर शेष नहीं बचा है कि जिसे हिंदू धर्मीय हक से ’यह मेरा देश है’ कह सकें.
अल्प प्रमाण में ऐसी परिस्थिति है कि भारत में थोड़ा बहुत हिंदू धर्मीयों का सुना जा सकता है. इसलिए भारत के हिंदुओं को अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए जागृत होने की आवश्यकता है. इस धर्म को राजाश्रय न होने के कारण मुस्लिम एवं ईसाई लोग भारत देश में भी हिंदू धर्मीयों का धर्मांतरण कर रहे हैं. भारत में अनेक राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यांक हैं. इस देश के उर्वरित राज्यों में मुस्लिमों का जेहादी लव एवं क्रिश्चनों का धर्मांतरण हिंदू धर्मीयों के अस्तित्व को प्रचंड धक्का पहुंचा रहे हैं. इसके पूर्व बंदूक का भय दिखाकर व तलवार की नोंक पर मुसलमानों व क्रिश्चनों ने इस देश के हिंदुओं को धर्मांतरित किया ही है, यह संभवतः उनकी दृष्टि से कम काम हुआ है. इसलिए राजाश्रय के बल पर खुलेआम मुस्लिम जेहादी लव के मार्फत हिंदू लड़कियों को मुसलमान बना रहे हैं, वहीं क्रिश्चन हिंदुओं की गरीबी एवं अज्ञान का फायदा उठाकर बाप्तिस्मा कर रहे हैं.
वास्तव में इस देश में समान नागरी कानून आवश्यक है, यह केवल धर्मगुरु के नाते से हमारा मत नहीं है अपितु सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को कई बार समान नागरी कानून लागू करने का सुझाव दिया था. परंतु उनका समर्थन करने के लिए राजकर्ता जानबूझकर इस ओर अनदेखी कर रहे हैं. हिंदू धर्म का अस्तित्व बचाए रखने के लिए कम से कम धर्मांतरण बंदी कानून बना होता तो क्रिश्चन व मुसलमानों द्वारा आज जो धर्मांतरण किए जा रहे हैं, वे नहीं होते. सरकार कुछ नहीं करती और उपरोक्त कम्युनिटी हिंदुओं को चैन से जीने नहीं देती फिर धर्म की रक्षा करने के लिए जिन-जिन हिंदुओं को ये लोग धर्मांतरित कर रहे हैं, उन-उन हिंदू परिवारों को पुनःश्च शुद्ध कर इन धर्मांध लोगों पर क्या रोक नहीं लगाई जानी चाहिए?
मूलतः हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में गए लोगों में हम हिंदू धर्म के विषय में जन-जागरण करते रहते हैं. हमारे इस जनजागरण के परिणामस्वरूप जिन्हें स्वेच्छा से हिंदू धर्म में वापस आने की बुद्धि हुई, उन लाखों परिवारों को पुनःश्च हिंदू धर्म में लाकर शुद्धिकरण की यह मुहिम हाथ में लेने से ईसाई मिशनरियों के कार्य पर कुछ प्रमाण में रोक लग रही है.
हमारे जैसा शुद्धिकरण का कार्य यदि हमारे शंकराचार्य एवं उर्वरित रामानंदाचार्य, उसी प्रकार हमारे अन्य साधु-संत करने लगे तो हमारे धर्मांतरित हिंदू पुनःश्च सम्मानपूर्वक हिंदू धर्म में वापस आ सकेंगे. यदि आप धर्म की रक्षा करेंगे तो ही धर्म आपकी रक्षा करेगा... धर्म के कारण ही एकजुटता हो सकती है... एकता के समक्ष राजसत्ता कमजोर पड़ जाती है. आज जिस-जिस धर्म में एकता है, उस-उस धर्म का लांगुल-चालन करने के लिए राजसता आतुर है...यदि आपको ऐसा लगता है कि आपके देवता, आपकी संस्कृति, आपके स्वतंत्र आचार-विचार अबाधित रहें तो धर्म की रक्षा हिंदू धर्मीयों के लिए समय की आवश्यकता है.
हम धर्मांध नहीं हैं, अन्यथा अन्य धर्म के लोगों को हिंदू धर्म की दीक्षा देकर इस धर्म में लाना हिंदू धर्म के लिए असंभव नहीं है. सहिष्णुवादी होने के कारण ही ऐसा अविचार हमारे मन को स्पर्श नहीं करता. हम धर्माभिमानी अवश्य हैं...हमारे धर्म की रक्षा करना... धर्म के प्रति जागरुकता निर्माण करना... क्या हमारा आद्य कर्तव्य नहीं है? इसका अर्थ विश्वबंधुत्व को नकारना नहीं होता. विश्वबंधुत्व के लिए हम तैयार हैं परंतु यदि कोई जानबूझकर हमारे बांधवों की आर्थिक परिस्थिति का, उनके अज्ञान का फायदा उठाकर धर्मांतरण करना चाहेगा तो उसे ’जैसे को तैसा’ उत्तर के रूप में शुद्धिकरण करना हमारा वज्रनिर्धार है.


3 प्रतिक्रिया:
parampujya swamiji ka yah kary bahut jaruri hai aapke dwara hi yah karya ho sakta hai-ram tiwari bhilai chhattisgarh.
Prampujya Mauli ke es mahan karya me ham sabhi logo bad-chad kar sahaog dekar hindu hone ka praman de.
"SHREE GUDRUDEO"
;SHREE GURUDEV;MAULI TUMCHE MAHAN KARYAT HATBHAR LAVNYASATHI ASIRVAD DYA.
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